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तो जी हाँ, “फ़र्क़ तो पड़ता है”,
इस हिंदी कविता में उर्दू घुसाने में,
और आपको बताने में,
कि आख़िर “क्या ही हो जाएगा” ।
.
परिवर्तन आता है; जब तुम आसान नहीं लेकिन सही करते हो,
फिर चाहे कितना ही मुश्किल क्यों ना हो, हर बार सही कर जाने में ।
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एक समाज में;
जिसे बदलने में पीढ़ियाँ लगती हैं।
और दूसरा तुम्हारे भीतर;
जो दिखता है, मन की शांति और हौसले में।
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फिर बाहर कितनी ही उथल-पुथल या बर्फीले तूफ़ान क्यों न हो,
तुम्हारे भीतर हमेशा शांत सा बैठा रहता है; एक स्थिर व्यक्तित्व ।
.
जो झलकता है तुम्हारे चेहरे पर, एक मंद लेकिन सुकून भरी मुस्कान में ।
और वही देता है तुम्हें हिम्मत लड़ने की, इस ज़िंदगी में आने वाले इम्तिहानों से ।
Jan 31
at
7:52 PM
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